झोलाछाप की फौज कर रही मौज , बाबू की तानाशाही, नोटिस के नाम पर उगाही
झोलाछाप टीम की उगाही मामले हो चुकी है फजीहत

नवादा क्षेत्र में अवैध अस्पताल कर रहे मरीजों की जान से खिलवाड़
बदायूं। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में तैनात झोलाछाप बाबू नितिन यादव और नोडल डॉ मोहन झा ऑफिस में गाड़ी में नहीं बैठते है गाड़ी को लावेला चौक पर बुलाकर बैठकर क्षेत्र में निकलते हैं जिससे किसी को कोई जानकारी नहीं हो सके झोलाछाप टीम कहां जा रही है सूत्र बताते है कि उसके बाद झोलाछापों को नोटिस देकर आते है फिर उन्हें ऑफिस बुलाकर बाबू झोलाछापों से सेटिंग करके मोटी रकम वसूलता हैं और आईजीआरएस पर झूठी आख्या लगाकर निस्तारित कर देता है। जिसका एक मामले में खुलासा हुआ है निस्तारण में अवैध नर्सिंग होम बंद दिखाया है लेकिन वह अनवरत कार्य कर रहा है।आर्थिक समझौते के चलते कार्रवाई औपचारिक मात्र हो रही है। झोलाछाप बाबू की उच्च अधिकारियों द्वारा अगर जांच होती है तो भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाएगा।
कुछ समय पूर्व झोलाछाप का चार्ज बाबू नितिन यादव और नोडल डॉ मोहन झा पर रहा था लेकिन विवादित होने के कारण चार्ज छीन लिया गया था। सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता से मिलकर बीएएमएस डाक्टरों ने झोलाछाप टीम पर अवैध उगाई का आरोप लगाया था जिसको संज्ञान लेते हुए सीएमओ ने झोलाछाप टीम को तत्काल प्रभाव हटा दिया था। उसके कुछ समय बाद पुनः उसी टीम को चार्ज दे दिया जिसकी वजह से क्षेत्र में झोलाछापों से उगाही का सिलसिला बदसूरत जा रही है। जिसकी बजह से पटल बाबू की तानाशाही चल रही। सीएमओ इस मामले से बेखबर है।
डीएम के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश हुआ था। जिसमें टीम ने अभी तक झोलाछाप डॉक्टरों, निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। बल्कि नोटिस के नाम पर झोलाछापों से अवैध हो रही है शहरी, ग्रामीण क्षेत्र में हजारों की संख्या में निजी अस्पताल झोलाछाप डॉक्टर अपने- अपने अस्पताल धड़ल्ले से संचालन कर रहे है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो झोलाछाप के नोडल अधिकारी ने अब तक किसी निजी अस्पताल संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि जिलेभर में लगभग एक हजार से ज्यादा अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप क्लीनिक संचालित हो रहे है।ग्रामीण इलाके के अलावा शहरी क्षेत्र में अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक की भरमार है।
सवाल उठता है कि जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद भी झोलाछाप डॉक्टरों कार्रवाई नहीं हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक लगभग आधा दर्जन निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों का उपचार किए जाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को भी खतरा रहता है। यह डॉक्टर बिना किसी मेडिकल डिग्री या प्रमाण पत्र के गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं।सबसे ज्यादा इनकी संख्या मीरा सराय,खेड़ा नवादा , बिनावर, विजय नगला, कुंवर गांव, बिल्सी बिसौली वजीरगंज, उसहैत ,ककराला, उसावां ,सहसवान,में है। कई मरीजों की बीमारी इनके इलाज के बाद गंभीर हो जाती है। ऐसे में कई बार उनकी जान पर भी बन आती है। तो उसे आनन फानन में रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।


