श्राद्ध तर्पण से प्रसन्न होते हैं पितर : यज्ञआचार्य संजीव

बदायूं : श्राद्ध पक्ष के पवित्र दिनों में लोगों ने अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पारंपरिक श्रद्धा और भक्तिभाव से श्राद्ध-तर्पण किया। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने वेद मंत्रों के साथ विशेष पूजा-अर्चना की, यज्ञ भगवान को आहुति दीं और अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। पिंडदान और अन्नदान कर पितरों को तृप्त किया।
श्राद्ध पक्ष में बड़ी संख्या में लोगों ने पवित्र नदियों, सरोवरों और तीर्थ स्थलों पर स्नान कर पिंडदान किया। पिंडदान के बाद देवताओं, गायों, श्वानों, कौओं और यहाँ तक कि चींटियों के लिए भी भोजन कराया गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से पितर संतुष्ट होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। यज्ञ स्थल वैदिक मंत्रों की गूंज से गूंजते रहे। इस दौरान विशेष यज्ञ और हवन का आयोजन किया गया। गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक और पावन बन गया।
यज्ञाचार्य संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि श्राद्ध-तर्पण से पितर प्रसन्न होते हैं। उनके अनुदान और वरदान से परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि श्राद्ध केवल कर्मकांड भर नहीं है, बल्कि यह अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है। यह परंपरा हमें हमारी संस्कृति और सभ्यता से जोड़े रखती है और हमें यह संदेश देती है कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियां अपने अतीत को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि पितरों की कृपा से परिवार की हर समस्या का समाधान होता है। श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों को तर्पण और दान देने से उनके आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली आती है। कई परिवार जरूरतमंदों को वस्त्र और अन्नदान कर पुण्य अर्जित करते हैं। श्राद्ध पक्ष के आयोजन आधुनिकता के इस दौर में भी भारतीय समाज अपनी परंपराओं और संस्कारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। पूर्वजों की स्मृति में किया गया यह अनुष्ठान न केवल श्रद्धा का प्रतीक बना बल्कि समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था को और सशक्त करने वाला अवसर भी सिद्ध हुआ।
गायत्री परिजनों द्वारा पटियाली सराय, नेकपुर, शिवपुरम आदि स्थानों पर श्राद्ध तर्पण का आयोजन किया गया।



