पं.गुरुदत्त विद्यार्थी ने महर्षि दयानंद के मिशन को तीव्र गति दी

पं.गुरुदत्त विद्यार्थी ने महर्षि दयानंद के मिशन को तीव्र गति दी – आचार्य संजीव रूप ।

बिल्सी । शुक्रवार, तहसील क्षेत्र के ग्राम गुधनी में स्थित आर्य समाज मंदिर में आज महान समाज सुधारक प.गुरुदत्त विद्यार्थी की 131 वी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।

वैदिक विद्वान व केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के प्रान्तीय बौद्धिक अध्यक्ष आचार्य संजीव रूप आर्य ने आर्य समाज के महान प्रचारक प.गुरुदत्त विद्यार्थी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महर्षि दयानंद जी की मृत्यु के पश्चात उनकी स्मृति में प.गुरुदत्त व लाला लाजपत राय जी ने मिलकर डी ए वी संस्थान की लाहौर में स्थापना की । कालांतर में डी ए वी विद्यालयों का विस्तार हो गया । उनका निधन 26 वर्ष की आयु में 19 मार्च 1890 को हुआ था, परंतु उन्होंने अल्पकाल में ही आर्य समाज के प्रमुख नेताओं में पहचान बनायी व अनेको पुस्तकों की रचना कर दी । प.गुरुदत्त विद्यार्थी कुशाग्र बुद्धि व स्वाध्याय आदि के धनी थे। महर्षि दयानंद सरस्वती की मृत्यु के क्षणों में उन्हें ईश्वर में आस्था हुई और वे नास्तिक से पक्के आस्तिक बन गए। मास्टर अगरपाल सिंह नए बताया कि गुरुदत्त विद्यार्थी ऐसी कुशाग्र बुद्धि के धनी थे कि जो एक बार पढ़ लेते थे दोबारा उसे नहीं पढ़ते थे। श्रीमती प्रज्ञा आर्य, मोना आर्य, तानिया आर्य, भावना आर्य, कौशिकी आर्य आदि ने सुंदर भजन गाए

सभा में राकेश आर्य, सुखवीर सिंह, विचित्र पाल सिंह , प्रश्रयआर्य, अंशुल आर्य , विशेष कुमार आर्य आदि उपस्थित थे।

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