नहीं है एक पैर, फिर भी जा पहुंचे सफलता के शिखर पर ।

मुकेश मिश्रा।
सहसवान (बदायूँ) ।
“आरिफ अली” विकलांगता से जूझने के बाबजूद उनके पास हौसले की कोई कमी नहीं है। दो वक्त की रोटी के लिए आरिफ अली जो कि एक पैर से विकलांग है उसके बावजूद भी वर्षों से मार्केट के अंदर चाय बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। आरिफ अली जन्म से ही एक पैर से विकलांग हैं। जो लगभग 35 साल की उम्र के हैं। लेकिन इनके जज्बे आज भी इतने बुलंद हैं कि अगर किसी व्यक्ति के पास पैसे नहीं हो उसके बावजूद भी चाय फ्री में दे देते हैं। सबसे बड़ी बात आरिफ अली ने शुरू से ही मेहनत के बल पर अपने परिवार का खर्चा चला कर दो वक्त की रोटी कमाते हैं लेकिन लोगों के लिए आरिफ अली से इतना लगाव है कि लोग काफी दूर-दूर से इनकी चाय पीने के लिए इनकी कैंटीन पर खिचे चले आते हैं और चाय पीते हैं। सहसवान के अंदर आरिफ टी स्टील के नाम से इनकी कैंटीन बाजार विल्सनगंज गोल मार्केट के सामने मशहूर है। किसी ने सच ही कहा है

लहरों को साहिल की दरकार नहीं होती,
हौसला बुलंद हो तो कोई दीवार नहीं होती,
जलते हुए चिराग ने आँधियों से ये कहा,
उजाला देने वालों की कभी हार नहीं होती।

बुलंद हो हौसला तो मुट्ठी में हर मुकाम है,
मुश्किलें और मुसीबतें तो ज़िंदगी में आम हैं,
ज़िंदा हो तो ताकत रखो बाज़ुओं में लहरों के खिलाफ तैरने की,
क्योंकि लहरों के साथ बहना तो लाशों का काम है ।

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