पुलिस की मिलीभगत से चल रहा अवैध खनन ।

बदायूँ/कुंवरगांव । थाना क्षेत्र में पुलिस की मिलीभगत से अबैध खनन का सिलसिला काफी लम्बे अरसे से चलता आ रहा है जिसमें सिपाही सहित एक दरोगा भी सामिल हैं जो सीधे सीधे खनन माफियाओं से साठ-गांठ रखते हैं और खनन माफिया थाने में जाकर मोटी रकम दे देते हैं और रात्रि व दिन में जमकर खनन कर राजस्व विभाग को लाखों का चूना लगा रहे हैं । लेकिन खनन से संबंधित मामलों की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचती है पुलिस खनन से संबंधित मामलों को थाना स्तर पर ही निपटा देती है । और जब मामला तूल पकड़ता है तो पुलिस की भी फजीहत होती है और फिर उठते हैं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल । पुलिस से पूछने पर पुलिस कहती है कि मिट्टी डालने वाले के पास परमिट है तो कभी कहती है कि हाथ से मिट्टी डालने का अधिकार है । अब सवाल इस बात को लेकर उठता है कि अगर मिट्टी डालने का अधिकार और परमिट है। तो पुलिस पैसे क्यों लेती है। खनन माफियाओं से साठ-गांठ क्यों रखती है। और समय समय पर मिट्टी भरी ट्रैक्टर ट्रालियों को क्यों पकड़ा जाता है। पुलिस को निशुल्क मिट्टी डलवाने का अधिकार होना चाहिए । जबकि खनन विभाग ने जुलाई 2020 से निजी भूमि से मिट्टी उठाने का पंजीकरण करने के लिए एक पोर्टल चालू कर दिया है ।जिस किसी किसान को मिट्टी की जरूरत हो तो वह सीधे पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करा सकता है । लेकिन पुलिस का इतना डर बना हुआ है कि पुलिस बिना पैसा लिए मिट्टी डालने का अधिकार नहीं देती है ।
ऐसा ही एक मामला कुंवर गांव थाना क्षेत्र के गांव यूसुफ नगर का है जहां तीन दिन से लगातार दिनदहाड़े खनन चल रहा है जहां दूसरे के खेत से मिट्टी उठाकर एक प्लाट में डाली जा रही है । लेकिन पुलिस उसको रोकने के लिए नाकाम साबित हो रही है

इस संबंध में थाना प्रभारी रविकरन सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि आपको मिट्टी रुकवानी है तो मुझे एसडीएम साहब का फोन करवा दो मैं मिट्टी पकड़ लाऊंगा ।

इस संबंध में सदर एसडीएम लाल बहादुर जी का कहना है कि हमारे यहां से किसी प्रकार की मिट्टी की परमीशन नहीं होती और कोई परमीशन नहीं हुई है ।

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