फेसबुक पेज के उद्घाटन पर देश विदेश में विभिन्न प्रान्तों के साहित्यकारों ने मचाई धूम । - Latest News & Updates - Rohilkhand Prabhat News

फेसबुक पेज के उद्घाटन पर देश विदेश में विभिन्न प्रान्तों के साहित्यकारों ने मचाई धूम ।

Spread the love

बदायूँ। आज की विवशता व देश में व्याप्त महामारी के चलते माहेश्वरी साहित्यकार मंच के साहित्यकारों ने एक नया प्रयोग किया।अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर न हीरे मोती न सोना चांदी पर उससे भी बड़ी उपलब्धि ,जी हां । विभिन्न प्रांतों में व देश विदेश में निवास कर रहे साहित्यकारों को एक मंच पर जोड़ते हुए माहेश्वरी साहित्यकार मंच का फेसबुक पेज पर उद्घाटन सत्र जोर-शोर के साथ मनाते हुए बांगडोर संभाली गुलाबी नगरी जयपुर की मधु भूतड़ा जी ने ।मधु भूतड़ा ने सभी को पधारने का आमंत्रण देते हुए स्वागत प्रस्तुति दी पधारो सा ।साथ ही कहा-” साहित्य भाषा को निखारने की भाषा है ।”श्री सतीश लाखोटिया जी के शंखनाद धुन से कार्यक्रम को शुभारंभ करने की घोषणा की गई।श्री मती कलावती कर्वा जी द्वारा उद्घाटन उद्बोधन की सुंदर प्रस्तुति दी।
श्री श्याम सुंदर माहेश्वरी जी ने शुभकामनाएं देकर अध्यक्षीय भाषण दिया।स्वाति जैसलमेरिया ने व श्री मती सुनीता माहेश्वरी ने सरस्वती वंदना का अलग रूप रखा।डॉ शुभ्रा माहेश्वरी बदायूं ने आज की महामारी पर
कहा – शायद मेरे देश में कोई दानव आया है, मानव का मानव से परिचय कराने ही आया है।श्री विष्णु आसावा ,बिल्सी ने कहा-“किंचित भी मत देखो घर से बाहर आकर के।”डॉ सूरज माहेश्वरी ने कहा-” घर को करती वृंदावन,जीवन महका जैसे चंदन”पूजा नबीरा ने जोड़ा” बीत जायेगी अमावस की रात काली”
सारिका फलोर (नैरोबी केन्या) से जुड़ते हुए बोली-“स्वर व्यंजनमंत्र से हिन्दी का हो ज्ञान।
अलंकार गहना बनें मात्रा से है जान।।
पुष्पा बल्दवा जी ठाणे मुम्बई ने कहा-” सूरज की रक्तिम आभा है कविता।”सुनीता माहेश्वरी
भरत काबरा ने कहा-“कविता वह है जब तुम सो जाती हो वह आ जाती है तुम जब जाती हो वह चली जाती है
विनोद फाफ्ट ने रंग भरा-” तन मन धन से देते सहयोग हर परिस्थिति को कर स्वीकार।”लाखन लाल माहेश्वरी ने कहा-” सारी बातें इठे रह जाती।” श्री मुकुट बिहारी गांधी ने कहा-“बादल तो आते जाते रहते हैं।”राज श्री राठी (पुणे महाराष्ट्र) ,सुमन माहेश्वरी ,किरन कलांत्री ,संगीता तापड़िया ,रेखा लाखोटिया ,लता राठी ,सुनीता शारडा ,रंजना बिनानी,मीनू ,सुनीता हेडा ,श्वेता ,सरिता मोहता ,उर्मिला तापड़िया( नोखा)भगवती जी बिहानी (,असम),मुरली लाहोटी ,नीलम मनोज सोमानी,रूपा चांडक ,रश्मि रोशन कांकानी,विजया न्याति ने सुंदर काव्यांजलि दी।
गीतू हरकुट अलीगढ़ ने कोरोना योद्धाओं को धन्यवाद ज्ञापित करती रचना पढ़ी।स्वाति मान्धाना, बालोतरा,अंकिता बाहेती,सुनीता मल्ल मल्ल
बिटठल माहेश्वरी ने कहा-” नहीं दिखेगी कोई मुस्कराहट, चेहरे मास्क से ढक जायेंगे।”रूपा चांडक
अनुभी माहेश्वरी ने अक्षय तृतीया का पर्व मनाने के बारे में जानकारी युक्त रचना पाठन किया।सुमिता मूंदड़ा,कुमकुम कावरा,रोशन कुमार झा,अनीता मंत्री, (अमरावती)संगीता आर्या दरक आदि सहित 50 से अधिक साहित्यकारों ने साहित्य धारा व सुर लहरी बहाई।मन में उमंग व मन में व्याप्त डर को मात देने वाला सफल कार्यक्रम रहा। प्रात 11.30 से रात्रि तक कार्यक्रम ने समां बाधे रखा। कार्यक्रम के अंत में संस्थापक श्री सतीश लाखोटिया व मधु भूतड़ा जी ने आभार व्यक्त किया।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *