सर्वोत्तम ज्ञान पाकर बनें, जन सुलभ और सर्वोपयोगी : सुखपाल


-भगवान श्रीकृष्ण ने दी कत्र्तव्य निष्ठा की शिक्षा, गांवों को बनाया तीर्थ
-जन्माष्टमी महोत्सव के दूसरे दिन बच्चे हुए सम्मानित, प्राचीन मंदिरों का किया भ्रमण

उझानी: अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में चल रहे प्रखर बाल संस्कारशाला के जूनियर बच्चों ने जन्माष्टमी महोत्सव के दूसरे दिन समापन हो गया। बच्चों ने लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी। नगर के धार्मिक, ऐतिहासिक, दर्शनीय तीर्थ स्थलों का भ्रमण के बाद देवी देवताओं के रूप में सजे बच्चों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि समाजसेवी सुखपाल शर्मा ने कहा कि श्रेष्ठ संस्कारों से मानव में देवत्व जाग्रत होता है। पवित्र दृष्टिकोण उदात्त और महान बनाता है। युवाशक्ति सर्वोत्तम ज्ञान पाकर जन सुलभ और सर्वोपयोगी बनें।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि कर्मयोगी भगवान श्रीकृष्ण ने कत्र्तव्य निष्ठा की शिक्षा दी। गोकुल, बरसाने, वृंदावन जैसे गांवों को तीर्थ बनाया। बच्चे महान लक्ष्य का न भूलें, उसकी प्राप्ति के लिए योजनाबद्ध यत्न और प्रयत्न करें।
महोत्सव में देवी देवताओं के रूप में सजे जूनियर वर्ग की कनक, रौनक, आयुषी, अंश, अद्भुत, भूमि और सीनियर वर्ग की कशिश, कल्पना, नेहा, दीप्ति आदि को गायत्री मंत्र का पटका और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। बच्चों ने नगर के प्राचीन मंदिरों के दर्शन किए।
इस मौके पर रीना शर्मा, सुनाली माहेश्वरी, रिंकी शर्मा, पिंकी शर्मा, आरती शर्मा, सौम्या, हेमंत, खुशबू आदि मौजूद रहीं। संचालन मृत्युंजय शर्मा ने किया।

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