डी.पी महाविद्यालय, सहसवान में “हिंदी दिवस” पर गीत, कविता और भाषण का आयोजन


बदायूँ । “हिंदी दिवस” के उपलक्ष्य में डी.पी. महाविद्यालय, सहसवान में छात्र/छात्राओं ने गीत, कविता और भाषण के द्वारा हिंदी प्रेम की अभिव्यक्ति दी । साथ ही पोस्टर निर्माण करके हिंदी के प्रेम को दर्शाया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ डायरेक्टर डॉ. एम.के. सोलंकी, प्राचार्या डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी एवं चीफ प्राक्टर डॉ. मुकेश राघव के द्वारा माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित करने के साथ हुआ । प्राचार्या डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा- “हिन्दी को वरीयता केवल 1 दिन ही नहीं अपितु अपने प्रतिदिन की दिनचर्या में देना चाहिए और कहा कि “हिंदी हमारी आन है हिंदी ही है शान, हिंदी में सद्भावना और है सम्मान ।”
डॉ. मुकेश राघव, (असिस्टेंट प्रोफेसर- भूगोल) ने कार्यक्रम का संचालन किया और बताया- “हिन्दी हमारे स्वाभिमान की भाषा है अतः हमें अपना कार्य हिंदी भाषा में करना चाहिए ।” डॉ. सोलंकी ने कहा- “हमें अपने हस्ताक्षर हिंदी में करना चाहिए और नए नए शब्द ढूंढ कर प्रयोग करने चाहिेए ।साथ ही सुप्रभात जैसे शब्दों से दैनिक दिनचर्या प्रारंभ करनी चाहिए।”
कु. सना (प्रवक्ता- भूगोल) ने “मैं नीर भरी दुख की बदली” महादेवी वर्मा की इन पंक्तियों को गीत के माध्यम से छात्र/छात्राओं तक पहुंचाया | वहीं कु. तृप्ति सक्सेना (प्रवक्ता- वाणिज्य) ने गीत के माध्यम से हिंदी का सम्मान करने को कहा । श्री भूपेंद्र गुप्ता (प्रवक्ता- गणित) ने हिंदी की महत्ता को रूपायित करते हुए कहा कि हिन्दी सब भाषाओं का मूल है। राजभाषा का दर्जा प्राप्त करते हुए भी वह व्यथित है।”
छात्राओं में कु. खालिदा ज़्या ने हिन्दी के राजभाषा तक के सफर को बताया । वहीं नेहा ठाकुर व नीलम ने दोहों को लय के साथ प्रस्तुत किया । अर्शीन का काव्यपाठ सराहा गया । आरती ने गीत प्रस्तुति दी । छात्रा वर्ग में सोनाली, कोमल सक्सेना ने कविता प्रस्तुत कीं ।अर्शीन ,आरती, नेहा व नीलम ने लघु नाटिका द्वारा हिंदी की दुर्दशा बताते हुए प्रश्न किए।
अपनी गरिमामय उपस्थिति देकर महाविद्यालय के प्रवक्ता वर्ग में कुमारी रितु सिंह (गृहविज्ञान), वैभव तोमर (कार्यालय अधीक्षक), श्री ज्ञानेंद्र कश्यप (इतिहास), श्रीमती गुलनार जमील (समाजशास्त्र), डॉ. नीलोफर खान (जन्तु विज्ञान), श्री दिव्यांश सक्सेना (अंग्रेजी), श्री विनोद यादव (राजनीति शास्त्र), श्री नितिन माहेश्वरी (वनस्पति विज्ञान) आदि ने उक्त कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई |
कार्यक्रम का समापन प्राचार्या डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी के द्वारा दिलाई गई हिन्दी की शपथ के साथ हुआ ।

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