हिंदी संस्कृत की बेटी है सबके दिलों में रहती है: आचार्य संजीव रूप

धूमधाम से मनाया हिन्दी दिवस
बिल्सी, तहसील क्षेत्र के ग्राम गुधनी में स्थित आर्य समाज मंदिर में हर्षोल्लास से हिंदी दिवस मनाया गया । इस अवसर पर सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा *हिंदी संस्कृत की बेटी है, हिंदी ही है जो सबके दिल में रहती है..! हिंदी ही है जो संपूर्ण राष्ट्र और विश्व की अंतर्राष्ट्रीय भाषा बन सकती है, जो सब को एकता के सूत्र में जोड़ सकती है! हिंदी स्वाभाविक भाषा है जिसमें जो बोला जाता है वही लिखा जाता है जो लिखा जाता है वही बोला जाता है ! हिंदी की सर्वत्र स्वीकार्यता के लिए जरूरी है कि हिंदी भाषी लोग जहां भी रहे जिस देश में भी रहे परस्पर हिंदी में संवाद करें तथा हिंदी में पत्राचार करें । जिस प्रकार इजराइल ने अपनी आजादी के बाद विश्व भर में बिखरे हुए यहूदियों को इकट्ठा कर जब अपना एक राष्ट्रगान एक संविधान बनाया तभी उन्होंने अपनी हिब्रू भाषा जो सैकड़ों वर्ष पहले कभी बोली जाती थी उसे पुनः प्रतिष्ठित किया उसे अपनी राष्ट्रभाषा बनाया और आज सभी लोग भी उसी हिब्रू भाषा का उपयोग करते हैं । हमारे देश का दुर्भाग्य है कि देश आजाद होने के बाद हम हिंदी भाषा को अपनी राष्ट्रभाषा नहीं बना पाए, इसी कारण हिंदी को हम अंतरराष्ट्रीय भाषा भी नहीं बना पाए। इस अवसर पर स्वामी बांसुरी वाले, माता निर्मला देवी, मास्टर साहब सिंह , राकेश आर्य, तानिया रानी मोना रानी, ईशा रानी आदि मौजूद रहे।

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