पूर्वजों के कल्याण, सद्गति और शांति करें, श्राद्ध तर्पण

वीरगति प्राप्त भारतीय सैनिकों, कोरोना महामारी में दिवंगत हुए लाखों आत्मीय परिजनों, वीरांगनाओं, महापुरुषों, पूर्वजों के किया सामूहिक तर्पण
-गाय, श्वान, काग, देवता और चीटियों को कराया भोजन

बदायूं। गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर पितृ आमावस्या पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा तृप्ति के पावन पर्व पर वीरगति प्राप्त भारतीय सैनिकों, कोरोना महामारी में दिवंगत हुए लाखों आत्मीय परिजनों, वीरांगनाओं, महापुरुषों, पूर्वजों के लिए सामूहिक श्राद्ध तर्पण हुआ। जिला समंवयक नरेंद्र पाल शर्मा ने मुख्य दीप प्रज्ज्वलित और नत्थू लाल शर्मा ने सपत्नीक मां गायत्री का पूजन किया।
शक्तिपीठ के परिब्राजक सचिन देव ने कहा कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, तृप्ति, शांति और सद्गति के लिए तर्पण करें। उत्कृष्ट भावनाओं से बना अन्तःकरण या वातावरण ही शांतिदायक होता है।
जिस प्रकार स्थूलशरीर वाले को इंद्रिय भोग, वासना, तृष्णा एवं अहंकार की पूर्ति में सुख मिलता है, उसी तरह पितरों का सूक्ष्म शरीर शुभ कर्मों से उत्पन्न सुगंध का रसास्वादन कर पूर्वज तृप्ति का अनुभव करते हैं।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि श्रद्धा पूर्वजों की प्रसन्नता और आकांक्षा का केंद्र बिन्दु है। श्रद्धा भरे वातावरण के सान्निध्य में पितर अपनी अशांति खोकर आनंद का अनुभव करते हैं, श्रद्धा ही इनकी भूख है, इसी से उन्हें तृप्ति होती है। इसलिए पितरों की प्रसन्नता के लिए श्राद्ध एवं तर्पण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शक्तिपीठ पर वीरगति प्राप्त भारतीय सैनिकों, कोरोना महामारी में दिवंगत हुए लाखों आत्मीय परिजनों, वीरांगनाओं, महापुरुषों, पूर्वजों के श्राद्ध के अलावा देव तर्पण, ऋषि तर्पण, दिव्य मानव तर्पण, दिव्य पितृ तर्पण, यम तर्पण, मनुष्य पितृ तर्पण, पितृयज्ञ (पिण्डदान) और पंचबलि में गाोबलि, कुक्करबलि, काकबलि, देवादिबलि, पिपीलिकादिबलि को विधिवत कराया। इसके बाद कन्याभोज कराया गया। इस मौके राजेश्वरी, ममता पाल, नन्ही देवी, जलधारा, शिशिर पटेल, केपी सिंह, अनुज सैनी, संजीव कुमार, आदि मौजूद रहे।

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