अज्ञान ही दुख का कारण है आचार्य संजीव रूप

बिल्सी, तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ ग्राम गुधनी में स्थित आर्य समाज मंदिर में श्रावणी उपाकर्म का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । इस अवसर पर सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने सर्वप्रथम यज्ञ कराया, यज्ञ के पश्चात उन्होंने कहा श्रावणी का अर्थ है “अच्छे प्रकार सुनकर कर्म करो, अर्थात ज्ञान देने वाले के पास बैठकर अर्थात सद ज्ञान ले करके ही कर्म करो। सद्ज्ञान लेकर जो कर्म करता है वह कभी पाप कर्म नहीं कर सकता । मां हमेशा सद् ज्ञान देती है पिता गुरु आचार्य और राजा हमेशा सद् ज्ञान ही देते हैं इसलिए इनके साथ जुड़ कर के ही ध्यान पूर्वक कर्म करना चाहिए, क्योंकि अज्ञान ही दुखों का कारण है, ज्ञान ही सुख का मूल है! इस अवसर पर अरे संस्कारशाला की प्रधान शिक्षिका श्रीमती प्रज्ञा आर्य ने सुंदर भजन गाए संस्कारशाला की बच्चियों ने वेद पाठ किया! विचित्र पाल सिंह भानु प्रताप सिंह अंशुल कुमार सिंह सुखबीर सिंह कृष्ण आर्य भावना रानी अंजलि रानी श्रीमती सूरजवती देवी आदि मौजूद रहे।

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