कवि दीपक तिवारी दिव्य का विदाई समारोह ।

बदायूँ । भारतीय हिंदी सेवी पंचायत द्वारा दैव कैफे पर कवि दीपक तिवारी दिव्य ( शिक्षक) को अंतर्जनपदीय स्थानांतरण उपरांत की गयी विदाई , विदाई समारोह में हुई काव्य संध्या , जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विष्णु असावा ने की और मुख्य अतिथि हरिप्रताप सिंह राठौड़ मुख्य प्रवर्तक (भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान ) रहे। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अचिन मासूम की सरस्वती वंदना से हुई।
शायर शैलेन्द्र देव मिश्र ने पढा़
“इश्क की राह में मुश्किल नही देखी जाती,
यार मिलता है तो महफ़िल नही देखी जाती।”
बिल्सी से आए विष्णु असावा ने पढ़ा
“बचपन बीता जिस गांव में उसकी याद सताती है
याद सताती है उसकी याद सताती है”
अचिन मासूम ने मुक्तक पढ़ा
“चढ़ता सूरज हूं इक दिन उतर जाऊंगा,
तुम जो छू लोगे तो मैं निखर जाऊंगा,
मेरे जीवन का बेदाग दर्पण हो तुम,
मैं तुम्हें देख लूंगा संवर जाऊंगा” !!
कवियत्री सरिता चौहान ने गीत पढ़ा
“सीधा सादा सा सरल सा मन
साथ अपने ले चला मधुवन
कागज़ों में खुशबुएं भरने की करनी है तैयारी
दूर जाने से रुदन कर ने लगी उपवन की क्यारी”

हर्षवर्धन मिश्र ने मुक्तक पढ़ा
“हर खुशी को निसार करते हैं
दिल के टुकड़े हज़ार करते हैं
जिनकी तकदीर में हो दर्द लिखा
बस वही हैं जो प्यार करते हैं”

पवन शंखधार ने पढ़ा
“जब से भारतीय संस्कृति गुमनाम हुई है
तब से गली मोहल्ले में मुन्नी बदनाम हुई है”।
इसके अलावा दीपक तिवारी दिव्य , प्रेम दक्ष ,अकरम भाई ने भी काव्य पाठ किया। काव्य गोष्ठी का संचालन शैलेंद्र देव मिश्र व पवन शंखधार ने किया ।
इस अवसर पर गोष्ठी में पुष्पेन्द्र शर्मा, बासुदेव मिश्रा, अवधेश पाठक, वरुण पटेल, नितिन पटेल, शिवेंद्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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