बरसों से जमीन तलाशती कांग्रेस ग्राउंड लेवल पर अभी भी ज़ीरो - Latest News & Updates - Rohilkhand Prabhat News

बरसों से जमीन तलाशती कांग्रेस ग्राउंड लेवल पर अभी भी ज़ीरो

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बरेली:पंचायत चुनाव को लेकर भले ही इन दिनों कांग्रेस ने राजनितिक बिसात बिछानी शुरू कर दी हो लेकिन चुनावी मोहरो की कमी के चलते कांग्रेस बरेली में अपनी ज़मीन तलाशती नज़र आ रही है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले अशफाक सकलैनी को बरेली की कमान सौपी गयी हो लेकिन सूत्रों की माने तो प्रियंका गांधी के भरोसे पर अशफाक किसी भी स्तर से जनता के बीच अभी तक खरे उतरते नहीं दिख रहे है। बरेली ज़िले में अगर कांग्रेस जानी जाती है तो सिर्फ प्रवीण सिंह ऐरन के नाम से जिसमे जिला कमेटी के अध्यक्ष अशफाक सकलैनी भी उनके सामने बौने नज़र आते है। भले ही प्रियंका की बढ़ती सक्रियता से योगी सरकार परेशान दिख रही हो। जहाँ एक ओर प्रदेशों में जारी चुनावी दंगल के बीच कांग्रेस महासचिव तैयारियों में जुटी है। वही दूसरी ओर बरेली में कांग्रेस की स्थिति रामभरोसे नज़र आ रही है अंदरखाने से सूत्रों कि माने तो बरेली में कांग्रेस के पास नेतृत्व कि कमी है तो वही सदस्यों के नाम पर पार्टी के पास केवल गिने चुने चेहरे ही है जबकि प्रियंका गाँधी का असली लक्ष्य 2022 विधानसभा चुनाव है, जिसके मद्देनजर उन्होंने अपनी नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का पूरा ख्याल रखते हुए आगे बढ़ रही है। बरेली सीट पर मुस्लिम, कुर्मी, वैश्य, दलित, लोध, ब्राह्मण, मौर्य, कश्यप, लोध और कायस्थ मतदाता निर्णायक संख्या में हैं।
शहर में होता है सिर्फ इनके नाम का असर

गौरतलब है कि 2009 के चुनाव में कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन ने सात बार रहे सांसद संतोष गंगवार को हराकर राजनीतिक विश्लेषकों को हैरानी में डाल दिया था। वही बात की जाए मेयर पद की तो वो भी प्रवीण सिंह ऐरन की पत्नी सुप्रिया ऐरन ने 2006 में जीत दर्ज कर कांग्रेस की झोली में डाला था। इससे साफ़ ज़ाहिर हो जाता है कि शहर में कांग्रेस कि परिस्थितियां कैसी है।

रेस में लंगड़े घोड़ो पर दाव लगाते मिर्ज़ा अशफाक

हाजी इस्लाम बब्बू का नाम राजनीति क्षेत्र में भले ही काफी पुराना हो मगर अपने नाम के हिसाब से इस्लाम बब्बू मुस्लिम वोटरों की सहानभूति तक नहीं बटोर पाए हैं। जबकि हाजी इस्लाम बब्बू ने उत्तर प्रदेश की सारी पार्टियों का स्वाद चख लिया है। मगर किसी भी पार्टी में जब इस्लाम बब्बू की दाल नहीं गली तो उसके बाद थक हार कर इस्लाम बब्बू ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। भले ही कागज़ो में कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा हो मगर विपक्ष के खिलाफ किसी भी आंदोलन में अशफाक सकलैनी भीड़ ना के बराबर जमा कर पाए हैं।फिलहाल विधान सभा चुनाव में चुनावी खेल तो सभी दलों का खराब होने की आशंका है, लेकिन ज्यादा असर बरेली में कांग्रेस पर पड़ सकता है।

आलोक शर्मा संवाददाता आवंला।


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