किड्जी स्कूल के विरुद्ध धोखाधड़ी के मामले में दर्ज हुई एफआईआर ।

इलाहाबाद:किड्जी स्कूल नोयडा की फ्रेंचाइजी दिलाये जाने के नाम से सर्वे करने के उपरांत 2,67,500 रुपये डी.डी. के द्वारा लेकर धोखाधड़ी कर फ्रेंचायजी न दिए जाने और रुपये हड़प कर लेने पर एसएसपी को दिनांक 28-9-2020, 2-2-2021 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराए जाने हेतु दिये प्रार्थना पत्र पर धूमनगंज दरोगा चंद्रभानु, इंस्पेक्टर अरुण चतुर्वेदी व सीओ अजीत सिंह चोहान की बड़ी लापरवाही नजर आयी है। दरोगा ने फर्जी तरीके से शिकायत का निस्तारण विपक्षियों से बात कर पैसे लेकर कर दिया। जबकि जाच में राजदेव पटेल, एडिशनल कमिश्नर निवासी 279 राजरूपुर, प्रयागराज से कोई वार्ता नही की गई और शिकायत के निस्तारण का एसएमएस द्वारा पता चलने पर आख्या रिपोर्ट देखते ही बोले कि मेरा रुपया डूब गया इसी बात पर गिर पड़े, उनको ब्रेन स्ट्रोक आ गया था। आंनद हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा था। उनके 2 बेटे हाइकोर्ट में अधिवक्ता है।

इस मामले हाइकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने पैरवी कर तत्काल DGP, ADG, IG, SSP को ट्विटर पर शिकायत की और SSP से बात करने पर पुनः जांच कर FIR दर्ज करने का अस्वासन दिया गया था वहीं प्रिंट मीडिया व सोशल मीडिया में खबर आने पर पुलिस की कार्यप्रणाली की जमकर निंदा हुई थी। आज 9 मार्च 2021 को धूमन गंज थाने में रीजनल मैनेजर किड्जी शब्बीर हसन,आराध्या शर्मा मैनेजर नई दिल्ली,व 2 अन्य के विरुद्ध FIR दर्ज हो गई।

हाइकोर्ट अधिवक्ता सुनील चौधरी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया है कि एक पूर्व एडिसनल कमिश्नर के मामले की जाच कर FIR धारा 419, 420 करने में 7 महीने लग गए। आम आदमी के शिकायत के बाद एफआईआर का तो पता ही नहीं चलता । पुलिस ज्यादातर मामलों में धन उगाही कर थाने से मामलों को रफा दफा कर देती है। योगी सरकार में पुलिस तानाशाह हो गई है । इन पर लगाम लगाने की जरूरत है।

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