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किसने ना जाने क्या-2 मेरा नाम रखा हैं

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“माहेश्वरी साहित्यकार मंच ” पर अलग अलग प्रांतो के कवि- कवयित्रियों ने काव्य के मंच पर मचाई धूम गूगल मीट पर आनलाइन लाइव “मिलन के रंग काव्य के संग”
गत दिवस “माहेश्वरी साहित्यकार मंच” पर एक खूबसूरत कार्यक्रम का आगाज हुआ “मिलन के रंग काव्य के संग”जिसमें विभिन्न प्रांतों से कवि -कवयित्रियों ने काव्य के रंगों की छटा बिखेरी।
“माहेश्वरी साहित्यकार मंच” की संस्थापक एवं संयोजिका श्रीमती मधु भूतड़ा गुलाबी नगरी जयपुर ने महेश वंदना से कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। साथ ही ख्वावों की होली कविता द्वारा होली दर्शन कराया।स्वाति जैसलमेरिया सरु, संस्थापिका के द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुतिकरण रहा।सतीश लाखोटिया, नागपुर (महाराष्ट्र),संस्थापक ने पढ़ा-” होली के माहौल में चढ़ा मुझे अलग ही रंग ,मन में आया यही ख्याल इस बार खेलूंगा होली पड़ोसन के संग”। बदायूं ( उ. प्र) की प्रख्यात कवयित्री डॉ शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा-“
मेरे देश का हाल ना पूछो बसंत,
मनवा तुम्हारा दहल जाएगा।।
जो सुनाई व्यथा हमने देश की ,
हाल तुम्हारा फिर बिगड़ जाएगा।। विष्णु असावा,बिल्सी, बदायूं (उ .प्र) ने कहा
मन भावन फागुन आयो री सखि मिलकर खेलें होरी। विपुल माहेश्वरी अनुरागी , सहारनपुर ने कहा-“एक खुद्दारी है जिससे मैंने अपना काम रखा हैं,और किसने ना जाने क्या-2 मेरा नाम रखा हैं।” श्याम सुंदर माहेश्वरी छिंदवाड़ा ,संस्धापक ने संस्था के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कलावती जी कर्वा कूचविहार प बंगाल ने शब्दसुमन अर्पित किये।गीतू हरकुट अलीगढ़ ने कहा-” नारी… यूँ तो हर घर की मुस्कान कही जाती हूँ
हाँ मैं नारी हूँ नारी कही जाती हूँ।”
लखनलाल माहेश्वरी , अजमेर ने कहा -“ओ होली का रसिया महारे मन में बसिया थे आवो महारे घर महारे दिल में बसिया ” पूजा नबीरा ,काटोल (नागपुर) ने इस अंदाज में कहा-“वक्त ओ रे वक्त सुन ना तेरे ही इंतजार में पलकें सदा बिछी रहीं तुमको ही तो जीना था और एक पल भी तुम
मिले नहीं…..संचालन कर रहीं सुनीता माहेश्वरी, नासिक ने बचपन की यादों को ताज़ा करते हुए अपनी कविता पढ़ी। कविता मालपाणी जिंदगी तुम वही तो नहीं!!!!जो लेती हो,
बार बार मेरी परीक्षा !!!! सुनीता मल्ल आमगांव महाराष्ट्र ने कहा-“शब्द शब्द मिल करा गए
साहित्य का ज्ञान।इत्र सा महका गयेसभी रत्न धन खान।।”मालेगांव से सुमिता मूंदड़ा ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा पर कविता कही।
माहेश्वरी साहित्यकार मंच की शोभा को अपनी काव्य स्वर सरिता में सराबोर करने वाले कविगण रहे- डॉ सूरज माहेश्वरी (जोधपुर) ने “अग्नि के समक्ष ” कविता से समां बांधा, अंजना लाहोटी (सूरत ), किरण कलंत्री ,(रेनकूट)। श्याम सुंदर जेठा ने अपने विचारों से उड़ान दी ,रेखा लाखोटिया ( नागपुर), राज श्री राठी ,( अकोला), विनोद फाफट (नागपुर), सुमन माहेश्वरी (फरीदाबाद) ,संगीता दरक , सरस्वती बजाज (मुंबई), द्वारकाप्रसाद तापड़िया, जयपुर, अशोक कुमार गांधी,हरी माहेश्वरी ,भरत काबरा (छिंदवाड़ा) आदि माहेश्वरी साहित्यकार के महाकुंभ के साक्षी बने।


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