
सील हुए निजी अस्पताल पुनः संचालित विभाग की कार्रवाई शून्य

बदायूं। बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित अस्पताल अपने मुनाफा के चक्कर में लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के कई हास्पिटल, पैथालाजी डिलीवरी केंद्र धड़ल्ले से चल रहे हैं। इनके पास न तो प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी,फिर भी बुखार से लेकर डिलीवरी तक का जिम्मा उठाकर मरीजों की जान जोखिम में डालने से नहीं चूक रहे हैं। इसी के चलते मरीजों की मौत हो रही है ऐसा भी नहीं कि इन अस्पतालों के बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अनभिज्ञ हैं। क्योंकि इनका आशीर्वाद और मेहरबानी बनी हुई है इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है।
दातागंज में सिटी हाॅस्पिटल एक गर्भवती की मौत
कस्बा दातागंज कांसपुर रोड़ सिटी हाॅस्पिटल में शुक्रवार को एक गर्भवती की मौत हो गई थी। सूत्रों से हुई जानकारी में पता चला कि यही अस्पताल संचालक इसे पहले किराये के एक मकान में अपना अस्पताल चलाता था, तब भी एक प्रसूता की मौत हो गई थी। तीन बार अस्पताल सील होने के बाद भी अस्पताल संचालित हाेता आ रहा था। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है स्वास्थ्य विभाग के बाबुओं और अस्पताल संचालकों के गठजोड़ से अस्पताल संचालित हो रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खामोश हैं।
उझानी आशीर्वाद नर्सिंग होम दो बार सील होने के बावजूद हो रहा संचालित
उझानी में बिना पंजीकरण चल रहे आशा नर्सिंग होम में प्रसव से पहले गर्भवती की 26 दिसंबर 2024 को मौत हो गई थी। कोतवाली क्षेत्र के गांव अढौली निवासी ज्योति (22 वर्ष) पत्नी राधेश्याम को प्रसव के लिए बाइपास स्थित आशा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। मौत के इस अस्पताल को सील किया गया था। एक सप्ताह में खोल दिया था इससे पहले भी दो बार नर्सिंग होम विभाग ने सील किया, बावजूद इसके यह अब भी संचालित है। इसके अलावा आशीर्वाद नर्सिंग होम 10 नवंबर 2025 को सील किया गया था।
यह कार्रवाई एसीएमओ डॉ. मोहन झा द्वारा एक शिकायत के आधार पर की गई थी। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन रजिस्ट्रेशन से संबंधित कोई भी वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहा था। चार अन्य अस्पताल भी सील किए गए थे, जो अब भी बिना रोकटोक बाबुओं की मिलीभगत से नाम बदलकर अस्पताल संचालित हैं।
बिसौली में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद हुआ था सील अपोलो के नाम से अब भी संचालित
बिसौली कस्बे में बिल्सी रोड़ जीवन हेल्थ केयर व अपोलो निजी अस्पताल में प्रसव के बाद हालत बिगड़ने पर 31 जुलाई 2024 जुलाई को जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल के सामने हंगामा किया। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल सील करा दिया था। दोबारा अपोलो के नाम से अस्पताल संचालित हो रहा है।इनके पास न तो प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी फिर भी धड़ल्ले से डिलीवरी कर रहे हैं।
अवैध तरीके से संचालित अस्पतालों में इलाज में लापरवाही से मौतों का सिलसिला जारी है। ऐसी शिकायतें बढ़ने पर डीएम अवनीश राय ने डीएचएस की बैठक में सीएमओ को कड़े निर्देश दिए थे अवैध अस्पतालों की जांच कर कार्रवाई करें। पंजीकृत अस्पतालों की सूची सीएमओ ऑफिस पर चस्पा करें। बावजूद इसके जिले में अवैध तरीके से संचालित होने वाले अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार रोक नहीं लगा पा रहे हैं।
इसके अलावा शहर से लेकर कस्बों तक कुकुरमुत्ते की तरह गली-गली में अवैध अस्पताल, पैथालाजी सेंटर व प्रसव केंद्र संचालित हो रहे हैं। सीएमओ,डॉ. रामेश्वर मिश्र,अगर बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल संचालित होने लगे हैं तो यह गलत है। संबंधित के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।




