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बदहाली के आंसू बहा रही आजमगंज मढ़िया की गौशाला, गौशाला को ही बना दिया पशु श्मशानघाट

"गौशाला या पशु श्मशानघाट? आजमगंज मढ़िया की बदहाली ने खोली व्यवस्थाओं की पोल"

बदहाली के आंसू बहा रही आजमगंज मढ़िया की गौशाला, गौशाला को ही बना दिया पशु श्मशानघाट

“गौशाला या पशु श्मशानघाट? आजमगंज मढ़िया की बदहाली ने खोली व्यवस्थाओं की पोल”

कुंवरगांव/बदायूं। उत्तर प्रदेश सरकार जहां निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं सालारपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव आजमगंज मढ़िया स्थित गौशाला की हालत सरकारी दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही है। यहां व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं और गौवंशों का जीवन संकट में दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशाला का संचालन एक एनजीओ के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते गौशाला बदहाली का शिकार हो चुकी है। गौशाला परिसर में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मृत गायों को बिना पोस्टमार्टम कराए इन्हीं गड्ढों में दफनाया जाता है। परिसर में दो दर्जन से अधिक ऐसे गड्ढे मौजूद हैं, जिससे गौशाला का स्वरूप संरक्षण केंद्र से अधिक पशु श्मशानघाट जैसा दिखाई देता है।

भीषण गर्मी के इस मौसम में गौवंशों के लिए पर्याप्त छायादार व्यवस्था नहीं है। पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए आवश्यक इंतजाम भी नदारद हैं। आरोप है कि गायों को केवल सूखा भूसा खिलाया जा रहा है, जबकि पिछले करीब पांच महीनों से चोकर और अन्य पौष्टिक आहार की आपूर्ति नहीं हुई है। इसके चलते पशुओं का स्वास्थ्य लगातार खराब होता जा रहा है।

गौशाला में कई गायें बीमार अवस्था में पड़ी हुई हैं, लेकिन उनके उपचार की समुचित व्यवस्था दिखाई नहीं देती। पशु चिकित्सकीय देखरेख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, गौशाला में तैनात केयरटेकर के रहने की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से संचालन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गौशाला में विद्युत कनेक्शन वैध रूप से संचालित नहीं है और चोरी से बिजली का उपयोग किया जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो यह सरकारी नियमों की खुली अनदेखी मानी जाएगी।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांग की है कि गौशाला की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा पशुओं के भोजन, चिकित्सा, छाया और अन्य मूलभूत सुविधाओं को तत्काल बेहतर बनाया जाए। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और संस्था के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

अब बड़ा सवाल यह है कि गौवंश संरक्षण के नाम पर संचालित इस गौशाला की बदहाली पर प्रशासन कब तक आंखें मूंदे रहेगा और इन बेजुबान पशुओं को बेहतर जीवन देने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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