वाटर वूमेन शिप्रा पाठक के ‘हरित जेल महाअभियान’ ने पकड़ी रफ्तार

वाटर वूमेन शिप्रा पाठक के ‘हरित जेल महाअभियान’ ने पकड़ी रफ्तार

मेरठ जेल में बनी ‘पंचतत्व पौधशाला’, कैदी बनेंगे पर्यावरण प्रहरी
बदायूँ। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने वाली प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं ‘वाटर वूमेन’ के नाम से प्रसिद्ध शिप्रा पाठक का ‘हरित जेल महाअभियान’ अब पूरे प्रदेश में गति पकड़ता जा रहा है। गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर की जेलों में सफल पहल के बाद अब मेरठ जिला कारागार इस अभियान का नया केंद्र बन गया है, जहां ‘पंचतत्व पौधशाला’ की स्थापना कर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सुधार का अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया गया है।
मेरठ जेल में आयोजित ‘प्रकृति संवाद’ कार्यक्रम के दौरान शिप्रा पाठक ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज के साथ जेल परिसर में शमी का पौधा रोपित कर अभियान का विस्तार किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल समाज की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। जेलों को हरित बनाकर बंदियों को प्रकृति से जोड़ना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ‘पंचतत्व’ द्वारा प्रदेश की विभिन्न जेलों में ‘पंचतत्व पौधशाला’ स्थापित की जा रही है, जहां बंदियों को पौधों की देखभाल, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे जेलों में हरियाली बढ़ने के साथ-साथ कैदियों में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का विकास होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित बंदियों को संबोधित करते हुए शिप्रा पाठक ने शमी वृक्ष के धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान शनि को समर्पित शमी का पौधा भारतीय परंपरा में विशेष स्थान रखता है। जेल परिसरों में विकसित होने वाली ‘शमी वाटिकाएं’ आध्यात्मिकता और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम बनेंगी। यह पहल बंदियों के मानसिक एवं सामाजिक पुनर्वास में भी सहायक सिद्ध होगी।
शिप्रा पाठक का पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे अब तक नदियों और पर्यावरण बचाने के लिए लगभग तीन हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुकी हैं। उनकी संस्था ‘पंचतत्व’ के माध्यम से देशभर में 58 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। पिछले वर्ष उन्होंने देश के 31 कुलपतियों के सहयोग से 51 ‘सिंदूर वाटिकाओं’ की स्थापना कर एक नई पहल की थी, जबकि इस वर्ष उनका विशेष फोकस जेल परिसरों में ‘शमी वाटिका’ विकसित करने पर है।
मेरठ जेल से शुरू हुई ‘पंचतत्व पौधशाला’ की चर्चा अब बदायूँ सहित पूरे प्रदेश में हो रही है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह अभियान केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी सशक्त माध्यम बनेगा। समाज के जानकारों का कहना है कि यदि यह मॉडल प्रदेश की अन्य जेलों में भी लागू किया जाता है, तो यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
संवाददाता, अभिषेक वर्मा


