जल निगम की टंकी में चोरी के बाद खुला बड़ा राज, पिता की जगह ड्यूटी कर रहा था नाबालिग बेटा; अधिकारी मौन

जल निगम की टंकी में चोरी के बाद खुला बड़ा राज, पिता की जगह ड्यूटी कर रहा था नाबालिग बेटा; अधिकारी मौन

बदायूं। उसावां थाना क्षेत्र से बाल श्रम और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी से बैटरी चोरी होने के बाद पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ, उसने विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। कागजों पर तैनात मुख्य चौकीदार दिल्ली में नौकरी कर रहा था, जबकि उसकी जगह उसका नाबालिग बेटा टंकी की सुरक्षा संभाल रहा था।
रोजी-रोटी के चक्कर में परदेस गया पिता
जानकारी के अनुसार, पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने उसावां थाना क्षेत्र के ग्राम अहमदनगर रुखाड़ा में ‘हर घर जल, हर घर नल’ योजना के तहत जल जीवन मिशन द्वारा पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। इस टंकी की सुरक्षा और चौकीदारी के लिए गांव के ही सहसपाल नाम के व्यक्ति को नियुक्त किया गया था। बताया जाता है कि कुछ दिनों तक तो सहसपाल ने ठीक से ड्यूटी की, लेकिन बाद में वह अधिक कमाई और रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली चला गया।
मासूम के भरोसे थी लाखों की सरकारी संपत्ति
सहसपाल के दिल्ली जाने के बाद, उसकी जगह पर उसका नाबालिग बेटा पानी की टंकी पर रात-दिन ड्यूटी कर रहा था। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर बीती रात शातिर चोरों ने जल जीवन मिशन की टंकी पर धावा बोल दिया। चोर वहां से करीब दो कीमती बैटरियां खोलकर रफूचक्कर हो गए।
अधिकारियों में मचा हड़कंप, जांच में जुटी पुलिस
सुबह जब जल जीवन मिशन के कर्मचारियों को टंकी से बैटरी चोरी होने की भनक लगी, तो महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तमाम विभागीय अधिकारी और कर्मचारी अहमदनगर रुखाड़ा टंकी पर पहुंचे। मामले की सूचना तुरंत उसावां थाना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और जल्द ही चोरों को पकड़कर मामले का खुलासा करने का आश्वासन दिया।
बाल श्रम रोकने के सरकारी दावों पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने प्रशासनिक निगरानी पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। शासन और श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर बाल श्रम रोकने के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद, सरकारी प्रोजेक्ट (जल जीवन मिशन) की सुरक्षा में एक नाबालिग मासूम से ड्यूटी कराई जा रही थी। अब क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्थानीय अधिकारियों को भनक होने के बावजूद इस गंभीर लापरवाही को क्यों नजरअंदाज किया गया।



