
सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव नजरबंद, आवास पर भारी पुलिस बल तैनात

बदायूं। दिल्ली में विपक्षी नेताओं की हिरासत के विरोध में उत्तर प्रदेश में उपजे सियासी उबाल के बाद भारी गुस्सा देखा गया। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष आशीष यादव को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। बुधवार सुबह से ही उनके आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद रहा और किसी भी कार्यकर्ता या नेता को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
विपक्षी नेताओं की घेराबंदी
प्रशासनिक अमले ने एहतियात के तौर पर सपा जिलाध्यक्ष के साथ-साथ कई अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को भी नजरबंद किया गया है। सपा के वरिष्ठ नेता सुरेश पाल सिंह चौहान, नरोत्तम यादव, वैभव उपाध्याय और कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव सहित दर्जनों प्रमुख चेहरों को उनके घरों में ही रोक दिया गया। इस कार्रवाई के चलते विपक्ष का प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह ठप हो गया।
लोकतंत्र की हत्या और उत्पीड़न का आरोप
आवास पर नजरबंद किए गए सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से तानाशाही है और विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनके घर पर डेरा डाले हुए है, जिसके कारण उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और रात भर सोने तक नहीं दिया गया।
सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का कर रही दुरुपयोग
सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह पूरी तरह से तानाशाही सरकार है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर नौजवानों, छात्रों और हमारी बेटियों के प्रति जिस तरह से क्रूरतापूर्वक घृणित कार्य किया गया है, उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया, हम उसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना चाहते हैं। पुलिस बिना किसी लिखित आदेश के मेरे आवास पर डटी हुई है। पूरी रात न तो हमें सोने दिया गया और न ही खाना खाने दिया गया। यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की छवि को नुकसान पहुंचाने और जनता के मुद्दों को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे हम डरने वाले नहीं हैं।”




