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हेपेटाइटिस-बी की चपेट में आने से दो सगे भाइयों की मौत, मचा हड़कंप

हेपेटाइटिस-बी की चपेट में आने से दो सगे भाइयों की मौत, मचा हड़कंप

 

 

बदायूं। दहगवां ब्लॉक क्षेत्र के गांव नसीरपुर में बुखार और पेट दर्द के चलते दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच हुआ है। खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव का दौरा किया। जांच रिपोर्ट से पता चला है कि दोनों भाई गंभीर संक्रामक बीमारी ‘हेपेटाइटिस-बी’ से पीड़ित थे। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग ने गांव में स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है।

 

इलाज के दौरान तोड़ा दम, झाड़-फूंक के चक्कर में बिगड़ी हालत

 

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पहला मृतक बृजेश (16 ) संभल के एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। उसे लंबे समय से खून की कमी और पैरों में सूजन की शिकायत थी। अचानक पेट दर्द बढ़ने पर परिजनों ने उसे बरेली और फिर फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां जांच में वह हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, लिवर पूरी तरह खराब होने के कारण 15 जुलाई की रात रास्ते में उसकी मौत हो गई।वहीं दूसरा भाई मोरपाल ( 20) भी काफी समय से हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित था। 19 जून को अचानक बुखार, पेट दर्द और उल्टी होने पर परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही झाड़-फूंक और निजी डॉक्टरों से इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज के बाद सफदरजंग अस्पताल दिल्ली ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 17 जुलाई को उसने भी दम तोड़ दिया।

 

स्वास्थ्य शिविर में मिले 5 नए मरीज, मलेरिया की रिपोर्ट शून्य

 

दो सगे भाइयों की मौत के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने 17 और 18 जुलाई को नसीरपुर गांव में विशेष मेडिकल कैंप लगाया। 17 जुलाई को गांव के 104 लोगों की हेपेटाइटिस-बी की जांच कराई गई, जिसमें से पांच ग्रामीण इस खतरनाक बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए 18 जुलाई को 129 लोगों की मलेरिया की भी जांच की गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि मलेरिया का कोई भी मरीज नहीं मिला।

 

गांव में लगातार जारी रहेगा कैंप: सीएमओ

 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि ब्लॉक स्तरीय संक्रामक रोग नियंत्रण टीम गांव में लगातार नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों को इकट्ठा करके स्वास्थ्य शिक्षा दी गई है और उन्हें दूषित पानी व गंदगी से बचने के उपाय बताए गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दहगवां के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देशित किया गया है कि में लगातार स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

जिले के सरकारी अस्पतालों या एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी केंद्रों में पिछले तीन महीनों से वायरल लोड टेस्ट नहीं हो पा रहा है इसकी मुख्य वजह प्रशासनिक, तकनीकी और लॉजिस्टिक्स है।

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