
शिवभक्तों को मिलेगी शुद्धता की गारंटी, ढाबों-होटलों में रेट लिस्ट और लाइसेंस चस्पा करना अनिवार्य, 25 सैंपल लैब भेजे

खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष चेकिंग अभियान, मीट-मछली और अंडे की बिक्री पर लगी रोक
रसूलपुर से कछला घाट तक 4 टीमों ने खंगाले रेस्टोरेंट और अस्थाई स्टाल

बदायूं। कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापरक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग पूरी तरह कमर कस ली है। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, जिलाधिकारी के निर्देश पर जनपद में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इसके तहत सहायक आयुक्त खाद्य-II के नेतृत्व में गठित 4 विशेष टीमों ने रसूलपुर से नवादा, नवादा से मेडिकल कॉलेज और मेडिकल कॉलेज से कछला घाट तक मार्ग के दोनों ओर स्थित ढाबों, होटलों, रेस्टोरेंट और अस्थाई स्टालों का सघन निरीक्षण किया।
ओवररेटिंग और मिलावट पर कड़ा प्रहार
निरीक्षण के दौरान सभी खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने प्रतिष्ठान के मुख्य स्थान पर खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से चस्पा करें। इसके साथ ही बेचे जाने वाले सभी खाद्य पदार्थों की रेट लिस्ट प्रदर्शित करनी होगी, ताकि श्रद्धालुओं से किसी भी तरह की अवैध वसूली न हो सके। संचालकों को परिसर में साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था रखने की भी हिदायत दी गई है।
फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप से मिलेगी पारदर्शिता
श्रद्धालुओं की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विभाग की टीमें कांवड़ मार्ग की दुकानों पर ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप से संबंधित साइनेज चस्पा कर रही हैं। इससे कांवड़ मार्ग से गुजरने वाले शिवभक्त ऐप के जरिए संबंधित दुकान और उसकी प्रामाणिकता की पूरी जानकारी मौके पर ही ले सकेंगे। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा मार्ग पर मीट, मछली और अंडे जैसी मांसाहारी सामग्रियों की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
मिलावटखोरों पर कसेगा कानूनी शिकंजा
श्रावण मास में शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए 1 जुलाई से 17 जुलाई तक एक व्यापक नमूना संग्रह अभियान चलाया गया। इस दौरान दूध, घी, क्रीम, तैयार सब्जी, खाद्य तेल, मसाले, मिठाइयां और ग्रीन चिली सॉस आदि के कुल 25 संदिग्ध नमूने एकत्र कर जांच के लिए खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत दोषी पाए जाने वाले मिलावटखोरों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।




