
96 बीघा निजी तालाब को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे रामबाबू कश्यप ने चौथे दिन तोड़ा अनशन, हक मिलने तक धरना रहेगा जारी

बदायूं। तहसील बिसौली के ग्राम बगरैन में 96 बीघा निजी तालाब पर कब्जे और प्रशासन की कथित अनदेखी के खिलाफ पिछले 28 दिनों से चल रहा धरना सोमवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। तालाब के स्वामी रामबाबू कश्यप, जो बीते 19 जून से भूख हड़ताल पर बैठे थे, ने चौथे दिन नायब तहसीलदार अमित कुमार के आश्वासन के बाद जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक धरना स्थल से घर वापसी नहीं होगी।

क्या है पूरा मामला?
पीड़ित रामबाबू कश्यप का आरोप है कि गाटा संख्या 1588 ग स्थित उनका 96 बीघा निजी तालाब पिछले 10 वर्षों से भू-माफियाओं के कब्जे में है। आरोप है कि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से भू-माफिया इस तालाब में अवैध रूप से मछली पालन कर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। पीड़ित का दावा है कि वर्ष 2022 से वह लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
अभिलेखों में हेराफेरी और नियमों की अनदेखी का आरोप
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना अपने दल-बल के साथ धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने नायब तहसीलदार को सबूत सौंपते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर तालाब की ‘नोईत’ बदली गई है।राजस्व अभिलेखों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है।वर्ष 2016 में नियम विरुद्ध तरीके से तालाब का पट्टा किया गया। पट्टा 154 बीघा का दिखाया गया, जबकि कब्जे में 250 बीघा जमीन ली गई है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर राजस्व निरीक्षक द्वारा झूठी रिपोर्ट लगाकर शासन को गुमराह किया गया है।
प्रशासनिक आश्वासन पर टूटा अनशन
चौथे दिन भूख हड़ताल के कारण रामबाबू कश्यप की स्थिति को देखते हुए नायब तहसीलदार अमित कुमार ने मौके पर पहुंचकर वार्ता की। उन्होंने न्यायोचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद रामबाबू ने अनशन तोड़ा।मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने वर्तमान एसडीएम बिसौली की कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए कहा कि “हमें उम्मीद है कि एक ईमानदार अधिकारी के सामने अब सारा सच आ गया है और गरीब किसान को न्याय मिलेगा।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी तालाब (154 बीघा) पर भी दर्जनों अवैध मकान बने हुए हैं और कई नंबरों में पानी न होने के बावजूद कागजों में पट्टा दर्शाया गया है।
रामबाबू कश्यप ने दोटूक शब्दों में कहा कि हक मिलने तक जारी रहेगी जंग” वह खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, “जब तक 96 बीघा तालाब और उसके किनारे लगे यूकेलिप्टस के पेड़ किसानों को वापस नहीं मिल जाते, तब तक धरना जारी रहेगा।




